मेने न्यूज़ में पढ़ा कि एक तेंदुए ने पुरे मेरठ शहर कि नींद उड़ा राखी है। और पूरा शहर खौफ के साये में है. हम इंसान है हमें हमेशा अपनी परेशानी का ही एहसास होता है। हमेसा अपनी सुविधाओ का ख्याल करते है। एक तेंदुआ हमारे शहर में आ गया तो हमें परेशानी हुई। लेकिन क्या हम सोचते है कि जब हम उसके घर में जाते है और उन्हें काटते है नस्ट करते है। तो उन्हें कितनी परेशानी होती है.
मुझे नहीं मालूम कि वो केसे शहर में आ गया लेकिन मुझे उसके लिए दुःख है कि वो अब कभी अपने परिवेश और परियावरण में वापस नहीं जा पायेगा जहा पे वो पला बड़ा है। जानवरो का आनंद उनका परिवेश उनका परियावरण हे होता है. जिससे वो बिछड़ गया है। अब वो हमेशा के लिए घर से बेघर हो गया। क्योंकि वो भटक के जंगल से शहर में आ गया।
यह दुनिया इंसानो और सभी वनिया जानवरो जीव जन्तुओ कि है। परन्तु इंसान ने इसे अपने हिसाब से बसना शुरू कर दिया है जिसका प्रभाव अन्य पशु पक्षियों जीव जन्तुओ पे हो रहा है। इसे सीधे शब्दो में कब्ज़ा कहा जाता है। हमें अपने सभी को धयान में रख के विकास करना चाहिए। अगर हमें लकडियो कि आवशयकता है तो हमें पेड़ लगाने चाहिए शहर एवं जंगल कि सीमाओ का निर्धारण और सुरक्षा के प्रबंध करने चाहिये। जिस तरह घर का मुखिया पुरे परिवार कि जरुरत और सुख सुविधा का ख्याल रखता है वेसे हे हम इंसानो को सभी को धयान में रखके विकास कि और बढ़ना चाहिये।
आज हम बोल रहे है कि एक तेंदुए ने पुरे शहर को परेशान कर रखा है हम परेशान है क्योंकि हम अपनी परेशानी बता पा रहे है लेकिन मेरा मानना है कि पुरे शहर ने एक जानवर को परेशान कर रखा है हमें उसकी परेशानी भी समझनी चाहिए वो भी अपने हिसाब से आचरण कर रहा है. अगर तेंदुए के शहरं में आने से हमें परेशानी हुई है तो उसकी वजह हम है लेकिन उस निर्दोष जानवर कि परेशानी कि वजह भी हम ही है।
बात जायदा बड़ी नहीं है। हमें जानवरो के दर्द का भी एहसास होना चाहिए उनका भी ख्याल रखना हमारी ही जिमेदारी है। आज पूरा शहर परेशां है लेकिन जो शहर में आया है वो भी तो खुश नहीं है… ऐसा शहर बसाया है हमने जंगल काटके !!!!!!

यह दुनिया इंसानो और सभी वनिया जानवरो जीव जन्तुओ कि है। परन्तु इंसान ने इसे अपने हिसाब से बसना शुरू कर दिया है जिसका प्रभाव अन्य पशु पक्षियों जीव जन्तुओ पे हो रहा है। इसे सीधे शब्दो में कब्ज़ा कहा जाता है। हमें अपने सभी को धयान में रख के विकास करना चाहिए। अगर हमें लकडियो कि आवशयकता है तो हमें पेड़ लगाने चाहिए शहर एवं जंगल कि सीमाओ का निर्धारण और सुरक्षा के प्रबंध करने चाहिये। जिस तरह घर का मुखिया पुरे परिवार कि जरुरत और सुख सुविधा का ख्याल रखता है वेसे हे हम इंसानो को सभी को धयान में रखके विकास कि और बढ़ना चाहिये।
आज हम बोल रहे है कि एक तेंदुए ने पुरे शहर को परेशान कर रखा है हम परेशान है क्योंकि हम अपनी परेशानी बता पा रहे है लेकिन मेरा मानना है कि पुरे शहर ने एक जानवर को परेशान कर रखा है हमें उसकी परेशानी भी समझनी चाहिए वो भी अपने हिसाब से आचरण कर रहा है. अगर तेंदुए के शहरं में आने से हमें परेशानी हुई है तो उसकी वजह हम है लेकिन उस निर्दोष जानवर कि परेशानी कि वजह भी हम ही है।
बात जायदा बड़ी नहीं है। हमें जानवरो के दर्द का भी एहसास होना चाहिए उनका भी ख्याल रखना हमारी ही जिमेदारी है। आज पूरा शहर परेशां है लेकिन जो शहर में आया है वो भी तो खुश नहीं है… ऐसा शहर बसाया है हमने जंगल काटके !!!!!!
कुछ पल के लिए उस तेंदुए कि जगह खुद को रखके मेने सोचा तो मुझे काफी दुःख हुआ
और मेरे रोंगटे खड़े हो गये और मेरे मन में एक सवाल आया कि मेरी गलती क्या है ???
अमित भड़ाना